सत्य का शोधक:अशोक कुमार पांडेय
देश में लोकतंत्र है, यह दो किताब (एक “उसने गाँधी को क्यों मारा”,दूसरा “गाँधी वध क्यों?”) एक साथ किसी दुकान में रखा देख कर आपको महसूस हो सकता है। हालाँकि लोकतंत्र परिपक्व है या अपरिपक्व इसका आकलन हर दिन होते रहना चाहिए। Ashok…
किसान आन्दोलन : इतिहास और वर्तमान
Written by Malay Nirav & Pooja Kumari ‘आन्दोलन’ एक सुनहरा शब्द। इस एक शब्द को सुनते ही आज़ादी से जुड़ी सुखद यादें, गाँधी-नेहरु से लेकर भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस सहित अनगिनत देशद्रोही (तात्कालिक ब्रिटिश सरकार की नज़र में) योद्धाओं के चेहरे आंखों के सामने…
कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट नहीं कर सकता है खारिज
Written by Sachin Baghel किसानों के प्रदर्शन को एक माह से ज्यादा हो गया है। वो खुले आसमान के नीचे ,ठंड़े पथरीले हाइवे के ऊपर अपना ढेरा डाले हुए हैं। दिल्ली में शीतलहर का प्रकोप कहर ढा रहा है और सरकार की टालमटोली का अंत निकट नजर नहीं आ रहा है । ठंड अबतक 40…
साहित्यकार जो हमसे दूर जा चुके हैं
Written by Sachin Baghel साल 2020 आपदा का साल था। असंख्य लोग असमय काल के जाल में समा गए । छोटे से लेकर बड़े और अमीर से लेकर गरीब सब इसकी चपेट में आये। साहित्य की दुनिया कैसे अछूती रह सकती थी। इस महामारी में साहित्य के कई सितारे बुझ गए। जिनमें मुख्य रूप…
विकासमय विनाश या विनाशमय विकास !
Written by Pooja Kumari विकास को बहुरंगी, सतरंगी होना चाहिए। एकरंगी विकास एक के लिए विकास हो सकता है तो दूसरे के लिए विनाश। एकरंगी विकास कब विनाश में तब्दील हो जाएगा, यह अनुमान से परे है। वैसे तो विनाश और विकास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं…
भ्रष्टाचार: भारत की एक नई पहचान !
“आजकल PM-किसान सम्मान निधि के घोटाले सामने आ रहे हैं जो डीबीटी की खामियों को उजागर कर रहे हैं। उदाहरण स्वरुप हिमाचल प्रदेश में फर्जी तरीके से 11, 388 आयकर देने वालों ने भी किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले लिया।” यह सर्वविदित है…
प्रदूषण : खबर में सिर्फ़ दिल्ली ही क्यों ?
“देश में एक ही PM ( प्रधानमंत्री ) होने चाहिए, इसलिए PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक कण की हमें जरुरत नहीं है।“ आये दिन, खासकर सर्दी के मौसम में, दिल्ली का प्रदूषण किसी फिल्मी सुपरस्टार की तरह टीवी, सोशल-मीडिया,अखबारों की सुर्खियों में छाया रहता…
आस्था प्रतीक राम
“सरकारों में थोड़ी भी गैरत हो तो रामराज्य की प्रजा और अपने देशवासियों की स्थिति की तुलना जरूर करनी चाहिए।“ आज भारतीय जनमानस का एक बहुत बड़ा हिस्सा खुशियों में सराबोर है।उत्सव मनाया जा रहा है।अयोध्या वासी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोग अपनी…
Little packets of hope amid the Corona crisis
Written by Astha Savyasachi “When the claws of hunger spread all across the country, fighters like Roshni, Arti, and Urmila, despite their own countless struggles, continue striving for humanity.” It is a scorching day and 22-year-old…
Our scapegoating Governments would be the only survivors of Coronavirus
“Even if the condition in India deteriorates our Governments have the ability to save themselves but we cannot…” The three major events in the coronavirus crisis that became or had the potential to become a major reason for the corona…