दक्षिणपंथी राजनीति में कितना राष्ट्रवाद ?
राष्ट्रवाद नहीं, भ्रमवाद! वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों में दक्षिणपंथी राजनीति का उभार देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ इन्हें राष्ट्रवादी भावना का पोषक मानते हैं। हो सकता है, इनमें से कुछ सच में राष्ट्रवादी विचारधारा से इत्तेफ़ाक़ रखते हों लेकिन…
मौलिक अधिकार और हमारी प्राइवेसी (भाग 2): आखिर क्या चाहता है वाट्सऐप!
Written by Malay Nirav & Pooja Kumari दिनों दिन के अनुभव बता रहें हैं कि हमारी सरकार और स्मार्टफ़ोन लकड़ी में पाए जाने वाले दीमक की तरह हमारी निजता को धीरे-धीरे खाए जा रहे हैं। सड़क पर रहने वाले लोगों की निजता, घरों में बंद रहने वाले लोगों से ज्यादा हो…
मौलिक अधिकार और हमारी प्राइवेसी (भाग 1): वाट्सऐप को हमारी निजता का कितना ख्याल!
Written by Malay Nirav & Pooja Kumari आपकी निजता का न होना ही आधुनिक होना है! आज कल यह सवाल गौण होता जा रहा है कि क्या ईश्वर होते हैं ? आज प्रमुख प्रश्न यह है कि आपकी निजता आपकी है या वह सार्वजनिक हो चुकी है। निजता कोरी कल्पना है या वास्तविकता, अब…
मानवता की कहानी
हम, तथाकथित सभ्य और श्रेष्ठ इन्सान, पंछी की तरह खुले आसमान में मुक्त उड़ना चाहते हैं लेकिन क्या हम इन पक्षियों की तरह मरना चाहेंगे? आप सोच रहे होंगे कि मैं यह बेतुका-सा सवाल आपसे क्यों पूछ रहा हूँ? शायद आप जानते हों या न भी जानते हों लेकिन क्या यह जान…
सत्य का शोधक:अशोक कुमार पांडेय
देश में लोकतंत्र है, यह दो किताब (एक “उसने गाँधी को क्यों मारा”,दूसरा “गाँधी वध क्यों?”) एक साथ किसी दुकान में रखा देख कर आपको महसूस हो सकता है। हालाँकि लोकतंत्र परिपक्व है या अपरिपक्व इसका आकलन हर दिन होते रहना चाहिए। Ashok…
किसान आन्दोलन : इतिहास और वर्तमान
Written by Malay Nirav & Pooja Kumari ‘आन्दोलन’ एक सुनहरा शब्द। इस एक शब्द को सुनते ही आज़ादी से जुड़ी सुखद यादें, गाँधी-नेहरु से लेकर भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस सहित अनगिनत देशद्रोही (तात्कालिक ब्रिटिश सरकार की नज़र में) योद्धाओं के चेहरे आंखों के सामने…
भ्रष्टाचार: भारत की एक नई पहचान !
“आजकल PM-किसान सम्मान निधि के घोटाले सामने आ रहे हैं जो डीबीटी की खामियों को उजागर कर रहे हैं। उदाहरण स्वरुप हिमाचल प्रदेश में फर्जी तरीके से 11, 388 आयकर देने वालों ने भी किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले लिया।” यह सर्वविदित है…
प्रदूषण : खबर में सिर्फ़ दिल्ली ही क्यों ?
“देश में एक ही PM ( प्रधानमंत्री ) होने चाहिए, इसलिए PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक कण की हमें जरुरत नहीं है।“ आये दिन, खासकर सर्दी के मौसम में, दिल्ली का प्रदूषण किसी फिल्मी सुपरस्टार की तरह टीवी, सोशल-मीडिया,अखबारों की सुर्खियों में छाया रहता…