वो कहानी जो कहानी नहीं थी!
By Malay Nirav यह कहानी कभी की नहीं है, न आज की, न बीते हुए कल की और न ही आने वाले कल की। यह कहानी न धरती की है, न अन्तरिक्ष की और न ही पाताल की। कहानी क्षणभंगुर है। हर शब्द लिखते ही मिटता भी जा रहा है। जब कहानी पढ़ा जा रहा…